आज का मानव और उसका जीवन. डर और control के आधार पर,दमन के आधार पर जीवन । कोई कहे रहम करो। हमारी सुनो। हमारी आय बढ़ाओं। वो कहते काम ज्यादा करो। वो कहते हमें पर्याप्त परक्षिशण दो। ऐसे मनुष्य क्या करें? एक ही उपाय है,जब दोनों एक दूसरे की समझे। एक दूसरे का मूल्य रख पाए। कि आपके बिना हम अधूरे हैं,और हमारे बिना आप।
सतयुग के मानव कैसे होंगे??* 👸🏻🫅🏻👸🏻🤴🫅🏻👸🏻🫅🏻🤴 ♥️16 कला सम्पूर्ण,सर्वगुणसम्पन्न ,सम्पूर्ण निर्विकारी, सम्पूर्ण अहिंसक,मर्यादा पुरुषोत्तम यह सतयुग में रहने वाले सभी मनुष्यों की 👌क्वालिटी होगी। सतयुग में पवित्र गृहस्थधर्म होगा। बच्चें विकारों की पैदाइश नही होंगे। वहां यथा राजा तथा प्रजा होगी अर्थात जितने सुखी समृद्ध राजाये होंगे वैसे प्रजा भी सुखी सम्पन्न होंगे। सबका खान पान अत्यंत सात्विक शुद्ध होगा। 👌🏼पहनावा रॉयल होगा। वहां का हर मनुष्य सभ्य और दैवी मैनर्स वाला होगा।वह किसी पर थोड़ा भी क्रोध नही करेगा। क्रोध करना हिंसा है और किसी भी तरह का हिंसा करना पापकर्म है।और सतयुग में कोई भी पाप कर्म नही करता। क्योंकि *देवतायें सम्पूर्ण अहिंसक थे,विकारो से अंजान थे।* इसलिए देव मनुष्य और असुर मनुष्य एक साथ,एक समय इस सृष्टि 🌎पर रहे ये नही होता। so सतयुग में असुर, विकारी संस्कार वाले कोई मनुष्य या प्राणी नही होते और कलियुग में देवी देवता समाज वाले कोई मनुष्य नही है। 🧌काले काले,सिंग वाले या भयानक दिखने वाले असुर होते ही नही है। ना ही चार या आठ हाथ वाले देवता होते है। पुराने ...
ये समय है महापरिवर्तन का कयामत का जब हर आत्मा को पवित्र बन वापिस घर जाना है। जब बाप आकर सबको जगाते है अज्ञान नींद से। सबकी अंतरआत्मा को जगाते है। क्योंकि देखने में जीवित लगते है परन्तु मरे पड़े,कोई भावनाएं नहीं है।महसूसता की शक्ति ही नहीं रही है। सच्ची खुशी, सच्चा प्रेम ,आनंद जीवन में जैसे है ही नहीं। किसी के साथ गलत करके,किसी का नुकसान करके मनुष्य को कोई पछतावा अथवा आत्म ग्लानि भी नही होती।ऐसे नहीं कि वह क्षमा मांग ले या जो गलत हुआ उसे ठीक करने का प्रयास करे। वह कोशिश ही नही करता समझने कि दूसरे व्यक्ति को कैसा लगता होगा क्योंकि आज मनुष्य के अंदर.से सद् भावना अथवा संवेदनशीलता खत्म हो चुकी है।वह स्वार्थी हो चुका है,उसे अपने से बड़ कर दूसरा कुछ दिखाई नहीं देता। ऐसा भी क्यों आज मनुष्य भोगी बन चुका है
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